बाजार में एक नंगा खडा था,
अपने मस्त, भ्रमण में व्यस्त,
नंगे ने जोर जी आवाज लगाई,
फिर अपनी नंगई दिखाई।
यह क्या ? लोग नंगे होने लगे।
कुछ थोडे, तो कुछ पूरे कपडे खोलने लगे।
आश्चर्य! वही नंगा, समाचार बनने लगा,
विज्ञापनों में उतरने लगा,
मैं ठिकका सहमा एक कोने में खाडा था,
और पूरा बाजार नंगों से अटा-पटा था।
पूरा बाजार नंगों से अटा-पटा था।
-गौतम हुडदंगी।

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